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मेरे अल्फाज़

जुदा होकर

Shivanand Chaubey

44 कविताएं

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जुदा होकर भी दिल मेरा उन्हें बस याद करता है
वो करती नफरतें हमसे मगर फरियाद करता है

तड़प बस एक नजर दीदार को उनके ये रहता है
की जैसे बादलों के दरमियां ये चाँद करता है

कभी बेचैन होता दिल कभी धक से धड़क जाता
दुआयें महफिलें मेरी तुम्हें ये आज करता है

दिले मेहमां हो मेरे तुम शिवम् एहसान कर देना
मोहब्बत की दवा देकर न गम का साज करता है

जवानी चांद भी खोकर रवानी पे न रहता है
मगर ऐ हमसफर मेरे तू किस पर नाज करता है !!

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