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मेरे अल्फाज़

इश्क़नामा

Shivam Shandilya

1 कविता

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यूँ तो अफवाएं तेरे बारे मैं बाजार मैं हज़ार में है,
पर ये बात मैंने भी सुना है,
की शायद तू भी मेरे प्यार में है।

यूँ तो बिक जाता है दिल हर हसीन आंखों में,
पर कमबख्त में अपना दिल भी गवां बैठा हूँ,
तुझमे तेरी यादों में,तेरी ही बातों में।

पर आज ही क्यों इस जीवन को एक कमी सी खाल रही है,
जब रात परवान पर है,
तो फिर क्यों सुबह न ढल रही है ।

पर में यह पूछता हूँ,
क्या तुम्हें मेरी खबर आज भी है,
हालांकि यह बात सच है कि मुझे तेरी सब्र आज भी है ।

नकली हंशी ओढ़कर दिन रात गुजार लेता हूँ,
पूछता फिरता हूँ सबसे ,
क्या मुझपर उसकी नज़र आज भी है।


एक ज़िन्दगी की अधूरी कहानी रह गयी,
तू ख्वाब में ही सही,
पर सारी ज़िन्दगानी रह गयी ।

लिख कर तुम्हे में हर लम्हा गुजार दिया,
पर फिर भी कहती हो ,
अनसुनी तेरी हर एक कहानी रह गयी ।

एक बार तो तुम्हारी याद मुझसे दूर जा रही थी,
तभी मेरे पास पड़ी तेरी पाजेब,
खनक कर उसे पास बुला रही थी

शिकवे गीले दिल के कभी बात भी दो,
और कितनी मोहब्बत है मुझसे,
थोड़ा जता भी दो ।

धीरे धीरे तू मेरी पन्हाओं में आने लगी हो,
में इश्क़ कैसे करूँ,
ये भी तुम ही सिखाने लगी हो ।

हर्फ़ दर हर्फ़ और एक लम्हा गुजर जाने दो,
अब दूर ही हो तो दूर ही रह ,
मुझे शायर बन जाने दो ।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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