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मेरे अल्फाज़

नींद !

Shishir Kumar

37 कविताएं

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नींद में बोझिल मेरी आँखों में
जब सपने रंग भरने लगते हैं
मैं सारी काराओं को तोड़ कर
हवा में उड़ने लगता हूँ
जो तुमसे मिल नहीं पाता हूँ,
बंद कमरे की दीवारों में
गहरे सागर में तुम्हें नींद में ढूंढ़ा करता हूँ
जमीं पर तुम्हें तलाश करते करते
कभी यूँ भी हवाओं से तेरा पता पूछा करता हूँ
दिन के उजाले में तुम अक्सर खो जाती हो
मैं तुम्हें मन के घने अँधेरे में ,तुम को ढूंढ़ा करता हूँ
तुम से बिस्तर पर बातें करते-करते,
रज़ाई को अपने काँधे पर रख कर अक्सर सो जाता हूँ
नींद में ऐसा होता है
तुमसे बातें करते करते अक्सर सो जाता हूँ 

- शिशिर कुमार

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