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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Shishir Kumar

53 कविताएं

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ज़मीन से जुड़े रहो गिरे कोई तो उसे उठाया करो
सुकून बड़ा मिलता है मिट्टी को गले कभी लगाया करो

कोई दौर बचा न रहेगा हर दौर की यही कहानी है
समय निकाल कर अपनों से कभी मिल जाया करो

खुद पर कभी गुस्सा हुए , कभी रोये- कभी हँसा किये
ज़िन्दगी यूँही बीत जायेगी यादों को सांझा कर कभी जाया करो

इत्मीनान बड़ा मिलता नीम की ठंडी छाँव में
घर की नीव को समय के धारा से कभी बचाया करो

सबकी खैरियत पूछ कर अपना ख्याल रखा करो
कोई तुम्हें भी चाहता है साथ उसके दो घड़ी बात कभी किया करो 

शिशिर कुमार

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