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L for Love

मेरे अल्फाज़

प से प्रेम

shipra khare

18 कविताएं

237 Views
प्रेम...
उम्र से बढ़कर
समय से परे
भाषा में कैद नहीं
न ही परिभाषा में समाये
.
इतना संवेदनशील
कि छुअन से थर्रा जाये
इतना मजबूत
कि पत्थर से टकरा जाए
.
पारदर्शी ऐसा
जैसे कि काँच
पर अदृश्य ऐसा
ढूंढने पर नज़र न आए
.
सरल इतना
हर सवाल सुलझ जाये
और जटिल इतना
कि जीवन सारा उलझ जाये
.
शीतल इतना
कि छाँव बन जाये
और इतना उष्ण
कि मन झुलसा जाये
.
इतना विशाल
कि आकाश नज़र आये
सहनशील इतना
कि धरती बन बिछ जाये

कि बड़ी मुश्किल है इसकी थाह पाना ..... !!

- शिप्रा खरे

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