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L for Love

मेरे अल्फाज़

प से प्रेम

shipra khare

15 कविताएं

233 Views
प्रेम...
उम्र से बढ़कर
समय से परे
भाषा में कैद नहीं
न ही परिभाषा में समाये
.
इतना संवेदनशील
कि छुअन से थर्रा जाये
इतना मजबूत
कि पत्थर से टकरा जाए
.
पारदर्शी ऐसा
जैसे कि काँच
पर अदृश्य ऐसा
ढूंढने पर नज़र न आए
.
सरल इतना
हर सवाल सुलझ जाये
और जटिल इतना
कि जीवन सारा उलझ जाये
.
शीतल इतना
कि छाँव बन जाये
और इतना उष्ण
कि मन झुलसा जाये
.
इतना विशाल
कि आकाश नज़र आये
सहनशील इतना
कि धरती बन बिछ जाये

कि बड़ी मुश्किल है इसकी थाह पाना ..... !!

- शिप्रा खरे

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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