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what you see, when you see women

मेरे अल्फाज़

क्या देखते हो स्त्री में?

Shilpa Thakur

10 कविताएं

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जब भी तुम किसी स्त्री की ओर देखते हो...उसमें क्या देखते हो, बता सकते हो?
एक आज़ाद पंछी की तरह जब वो हवा में उड़ती है,
उसके अंदर की दुर्गा ना चाहते हुए भी तुम्हें दिखती है पर फिर उसी आज़ादी के अख्ज़ तुम क्यों बन जाते हो,
बता सकते हो?
स्त्री के अंदर की बजाय बाहर की खूबसूरतू देख... उसे अपना बनाने की चाह में तुम जुट जाते हो,
पर उसके मना करने पर उसी खूबसूरती को बर्बाद कर उसे अज़ाब की चादर क्यों उढ़ा देते हो,
बता सकते हो?
मासूम दिल वाली उस स्त्री की मासूमियत की बजाय, तुम्हें उसके छोटे कपड़े और उसका तन ही दिखता है,
पर फिर आदिल बनने की बजाय उसकी आफ़ताब सी शख्सियत को छीन,
उसे आब-ए-चश्म के समंदर में क्यों डुबा देते हो,
बता सकते हो?
जब भी तुम किसी स्त्री की ओर देखते हो...उसमें क्या देखते हो, बता सकते हो?
(अख्ज़- छीनने वाला, अज़ाब- पीड़ा, आदिल- न्यायपूर्ण, सच्चा, आफ़ताब- सूर्य सी चमक
आब-ए-चश्म- आंसू)
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