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मेरे अल्फाज़

भोजपुरी के जइसन हउ

Shikhar Brajesh

6 कविताएं

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फाल्गुन के महीना में होरी के जइसन हउ
हमरे खातिर सजनी तू भोजपुरी के जइसन हउ

जाने कौने बगिया के मोर बाड़ू
हमरे चितवा के सजनी चितचोर बाड़ू

बेकल हो जाइ ला गोरी जब चिघारे ले कोयलिया
आधी आधी रतिया करेजवा धड़कावे ले कोयलिया

मिटावे खातिर गोरी हूकवा जिया के
जब जब होटवा से लगाईले बाँसुरिया

इहो बैरन पुकारे बस नमवा पिया के
अउरी सातवे ई पूर्वी बयरिया

छोड़ के तू गँउआ जब से गइलू गोरी
एगो चिट्ठीओ डाकिया से न पठईलू गोरी

ताकत बाड़ी गोरी बैठी हम अमवा के डरिया
बीत जाये चाहत बा अब ई जेठ के दोपहरिया

तन्हको न आवे ले गोरी याद तोहरेे करेजवा के
लागत बा की भुला गइलू तू अपना करेजा के

ई बारिश के पनिया सजनी
काटे न कटे बैरी रतिया सजनी

आग लग जाये हो रामा ई तोहरे सवनवा में
तू आ जा गोरी त आ जाये परान हमरे परनवा में

चल गईले सुगवा छोड़ अपना देश हो
बदल गईल बोली ओकर बदल गईले भेष हो

अब कासे कहीं हम राज अपना
एगो रहे सच जे हो गइले सपना

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