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बलिदान

                
                                                                                 
                            घर से निकले थे वो अपनी छुट्टी काट
                                                                                                

माँ ने दिया आशीर्वाद, कहां जल्दी आना मेरे लाल
गाड़ी में सवार जा रहे थे हमारे जवान
दुश्मनों के इरादों से बिल्कुल अंजान
फिर से किया था दुश्मनों ने पीछे से वार
हमारे लिए दे दी अपनी जान
शहीद हो गए हमारे जवान
देदी देश को शहादत की मिसाल
घर लौट आए वह जल्दी इस बार
घर लौट आए वह जल्दी इस बार
पर लिपटे हुए तिरंगे के साथ
आंसू से भरी आंखों और गुस्से से भरे
दिलों का बस एक ही था सवाल
खत्म करो यह आतंकवाद
खत्म करो यह आतंकवाद
व्यर्थ ना रह जाए शहीदों का बलिदान
यह तय कर लो आज
यह तय कर लो आज

-शिखा राणा (skrana)Dehradun

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3 years ago

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