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मेरे अल्फाज़

स्त्री रूप

Shikha Garg

22 कविताएं

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एक रात्रि क्षणिक एक प्रश्न मन में मेरे आया
हे ईश्वर! क्यूं तूने मुझे स्त्री रूप बनाया

दुर्गा सी शक्ति दी बुराई सर्वनाश करने को
फिर क्यूं मर्यादा की बेड़ियों में मुझे जकड़ाया
हे ईश्वर! क्यूं तूने मुझे स्त्री रूप बनाया

पुरुष-स्त्री एक समान नारा सबने जोरों से लगाया
फिर क्यूं लाज-शर्म का बोझ स्त्री पर ही आया
हे ईश्वर! क्यूं तूने मुझे स्त्री रूप बनाया

नारी सम्मान के श्लोक सिर्फ किताबों में मैने पाया
वरना हर गली सभा में नारी को अपमानित होते पाया

हे ईश्वर! क्यूं तूने मुझे स्त्री रूप बनाया

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