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मेरे अल्फाज़

वह लड़की

Shesh Amit

2 कविताएं

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पिता की मृत्यु के बाद पैदा,
वह लड़की
एक धरती है अक्षहीन,
जिसका चुटकी भर झुका धुरा टूट गया है,
सृष्टि की एक लुढ़कन,अब गेंद है-
उसे तलाश है पिता की,
जो अक्सर पीछे से कानों में कू..♪♪ कर छिप जाता है,
वह माँ जो है,
कभी उड़ेल देती है अपना पूरा पिता,
और कभी छिन भी लेती है अपनी माँ |
लड़की अक्सर उदास हो जाती है,
और तेज़ी से नाचते लकड़ी के तिरंगे लट्टू की तरह,
बेआवाज़ और स्थिर दिखती है,
फिर माँ ढलते सूरज की लंबी छाँह सी ढक,
लपेट देती है एक मुलायम चादर |
उसने सुना है कि एक पिता होता है,
जो बहता है रक्त में माँ की छतरी लिये,
शाख से विलगता है जब कोई पत्ता,
और किसी डाली पर कोई ललछौंहा खूंट झाँकता है,
देर तक देखती है वह लड़की,
कि पिता पत्ते सा छू लेगा उसके गाल,
सिर पर अबोले आशीर्वाद,
या आत्मीयता की एक लपेट,
पर हर पत्ता बूढ़ा होकर मर जाता है,
गेंद क्षितिज में लुढ़कने लगती है |
सुना है उसने,
पिता के हाथ अक्सर मज़बूत और ख़ुरदुरे होते हैं-
या चित्रकार के तूलिका सी स्पर्शी,
वह ढूँढती है हर पुरूष में एक पिता-
जो आईस-पाईस खेलते हुये उनमें छुप गया है,
हर खंभे के क़रीब से गुज़रते-
कहती है कुछ बैखरी में,
जिनका अर्थ एक है-तुम कहाँ हो ?
इस खोज में मिलते हैं उसे-
भेड़िये, कनखजूरे या साँप,
जो तितलियाँ नहीं है |
वह लड़की जानती है-
न्यूटन के आकाश मुखी होने का कारण,
या गुलाग के विद्रोही की पीड़ा,
एक ने अनावृत्त कर डाले प्रकृति के अनेक रहस्य,
दुसरे ने तोड़ डाला पंक्ति का अनुशासन,
कि वह फेफड़ों में दो मुठ्ठी ताज़ी हवा को जाने से रोक रहा था-
इनकी भी पहली सुबह लड़की की आपबीती है |
लड़की जब भी पहुँचती है सपनों के आँगन में,
एक बूढ़ी दादी कहती है फुसफुसाकर-
ये सारे खोज रहे थे पिता,
कुछ अनमोल पते मिले,पर जो पिता नहीं थे-
वह लड़की अब भी खोजती है,
पिता को-
हवा,पानी,माटी,आकाश और अग्नि में,
हर खंभे पर कान लगाकर सुनना चाहती है,
पिता की आहट,
जो जल में अपनी छाया सा अपना है |

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