आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Bharat Mata

मेरे अल्फाज़

भारत-माता

Shekhar Srivastav

7 कविताएं

120 Views
क्रांतिकारियों के शब्दों का कुंज बना कर लाया हूं
अपनी भारत माता की ताकत दिखलाने आया हूं|
अपनी भारत माता वह जो वीर हमेशा बुनती है
शेखर, सुभाष, पटेल के जैसा नेता हमको देती है|
अपने सपनों को भूल गए वह झूल गए उन फंदों पर
हम भारतवासी को अब भी नाज है ऐसे बंदों पर |
भारत माता के चरणों में जिसने जीवन काट दिया
बढ़-चढ़कर अंग्रेजों का जिसने देखो संहार किया|
अपराधी और आतंकी के शब्दों में वो गूंथ गए
पर कोई शिकवा नहीं रहा बस हंसते-हंसते झूल गए|
हमने ये सब सब देखा पर चुप बैठे बर्बादी पर
देख के भी हम घूंट सहे अपने गांधीवादी पर|
वही भगत जिसने हमको आजादी दिलवाई थी
आतंकी कहकर हम सब ने फांसी तक दिलवाई थी|
जो बात हमारे मन में थी वह लबों पर मेरे आई है
क्रांतिकारियों के बलिदानों से आजादी आई है|
आज राख का कण-कण उनकी गर्मी से गतिमान है
सच पूछो तो शेखर, भगत आज भी आजाद है|
बोले सुभाष थे आजादी को बलिदान तुम्हें करना होगा
जग में तुमने बहुत जिया आगे अब मरना होगा|
क्या कोई आजादी प्रेम से पाई जाती है
सर्वस्व न्योछावर कर देखो आजादी लाई जाती है|
फिर बोल पड़े बाबू मेरे खून मुझे तुम दे देना
इसके बदले में भारत की आजादी तुम ले लेना|
जनता फिर हुंकार उठी अपना रक्त चढ़ाने को
आजादी की खातिर अपना लहू बहाने को|
आकाश पृथ्वी पाताल लोक तक थर थर थर थर कॉपे थे
जब अपना लहू गिराने को आगे वह बढ़ते जाते थे|
ऐसे राज पुरुषों को मेरा बार-बार अभिनंदन है
उनको सौ सौ बार नमन मन प्राणों से वंदन है|

-शेखर श्रीवास्तव

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!