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मेरे अल्फाज़

चलो, फिर से मुस्कुराते हैं

Sheela Bisht

7 कविताएं

108 Views
चलो, फिर से मुस्कुराते हैं
कुछ लम्हे संग संग बिताते हैं

उन पलों को भी बुलाते हैं
जब मिले थे पहली बार
हां, वो ख्वाब भी ले आना
जो बुने थे साथ साथ

चलो, फिर से मुस्कुराते हैं
कुछ लम्हे संग संग बिताते हैं

बचपन को भी बुलाते हैं
वो भोलापन वो नादानियां फिर करते हैं
जवानी की वो लापरवाही भी लेते आना
वो मनमौजी, वो आसमां पे उड़ने का हौंसला

चलो, फिर से मुस्कुराते हैं
कुछ लम्हे संग संग बिताते हैं

भूल जाते हैं चलो समय की कुछ निशानियां
वो घर की और बाहर की जिम्मेदारियां
वो अपनों की और बेगानों की परेशानियां
दौड़ में सबसे आगे रहने वाली जिन्दगानियां

चलो, फिर से मुस्कुराते हैं
कुछ लम्हे संग संग बिताते हैं

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