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मेरे अल्फाज़

तू जींस न पहनो मेरी मां

Shashi Sharma

8 कविताएं

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तू जींस न पहनो मेरी मां
क्यूंकि.......

मिल न पाती तेरी आंचल की छाया,
सूर्य जलता मुझको मां
तेरे आंचल में छिपकर मैं
संसार देखता हूं तुझमें मां।

तू जींस न पहनो मेरी मां
क्यूंकि.......…

तेरे आंचल में प्यार भरा
हैं सुख का सैलाब भरा
तेरे आंचल की छाया पाकर
हो जाता धन्य तेरा बेटा मां।

तू जींस न पहनो मेरी मां
क्यूंकि.......…

तेरे आंचल की खुशबू ऐसी
जो हैं दुर्लभ दुनिया में मां
मेरे पास इतना शब्द कहां
जिससे बखान करूं मैं तेरी मां।

तू जींस न पहनो मेरी मां

-शशि रंजन शर्मा
दोन-दरौली,सीवान,बिहार

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