आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   meri smrtiyan

मेरे अल्फाज़

मेरी स्मृतियां

Sharad singh

85 कविताएं

8 Views
मेरी स्मृतियाॅ.....
पतझड़ के सूखे पत्तो सी बन गयी यह जिन्दगी,
लोग बडे़ जतन से समेट कर आग लगा देते हैं....

अन्धेरों से डरकर जब खुद को जला बैठे
लोगो ने कहा लो हो गयी रोशनी उसके यहां......
.....शरद सिह.|.......


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!