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मेरे अल्फाज़

मेरी स्मृतियां

Sharad Singh

95 कविताएं

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मेरी स्मृतियां....
हम तुम्हें एक ग़ज़ल भेजते हैं
टूटे दिलों की नकल भेजते हैं
अपना लेना या ठुकरा देना इसे तुम
अरमानों भरा येह दिल भेजते हैं

- शरद सिंह" शरद"

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