वफ़ाओं की कीमत कुछ भी नहीं

                
                                                             
                            हमारे अश्क़ तो, कुछ भी नहीं उनके लिए !
                                                                     
                            
हमारी मुश्किलें, कुछ भी नहीं उनके लिए !

कहते तो चले जाते इस दुनिया से मगर,
हमारी मौत भी, कुछ भी नहीं उनके लिए !

दिल की उमंगों को कर देते दफ़न लेकिन,
दिल का टूटना तो, कुछ भी नहीं उनके लिए !

ज़फ़ाओं की इन्तेहां देखी है आंखों ने "मिश्र",
वफ़ाओं की कीमत, कुछ भी नहीं उनके लिए !

शांती स्वरूप मिश्र

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1 year ago
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