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मेरे अल्फाज़

सपने सजाना फ़िज़ूल है

Shanti Swaroop

1112 कविताएं

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यारों व्यर्थ में सपने सजाना फ़िज़ूल है !
आँधियों में दीपक जलाना फ़िज़ूल है !

न आता हो जिसको जीने का सलीका,
उसे हुनर जीने का बताना फ़िज़ूल है !

गर नहीं है आँखों में शर्मो हया का पानी,
उन पे खांमखां पर्दा लगाना फ़िज़ूल है !

जो जीते हैं अंधेरों के रहमो करम पर,
वास्ते ऐसों के शम्मा जलाना फ़िज़ूल है !

जहाँ गुलाब हैं वहां कांटें भी होंगे दोस्त,
फिर बागवां पे गुस्सा दिखाना फ़िज़ूल है !

हर किसी का होता तरीका अलग अलग,
यूं ही हर जगह टंगड़ी अड़ाना फ़िज़ूल है !

जो न समझे किसी की आफतों को कभी,
ऐसों को दास्ताँ अपनी सुनाना फ़िज़ूल है !

न मरता है साथ कोई भी किसी के 'मिश्र',
किसी के मोह में फंसना फ़साना फ़िज़ूल है !

- शांती स्वरूप मिश्र

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