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patthar dilon se rishte nibhate kyon hain

मेरे अल्फाज़

पत्थर दिलों से रिश्ते निभाते क्यों हैं

Shanti Swaroop

320 कविताएं

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ख़ुद ही काँटों भरे ये रास्ते, हम बनाते क्यों हैं 
यारो पत्थर दिलों से रिश्ते, हम निभाते क्यों हैं 

जब जानते हैं दुनिया की बेरुख़ी का आलम
तो औरों को खुद उजड़ के, हम बसाते क्यों हैं 

न समझता है कोई भी औरों की मुश्किल यारो
तो दिल में औरों के दर्दो ग़म, हम बिठाते क्यों हैं 

ज़रा सी बात पर कभी अपने पराये नहीं हो जाते
फिर दुश्मनों से दिल आखिर, हम लगाते क्यों हैं 

जो खड़ा था कभी साथ साथ हर कदम पे "मिश्र"
सबसे ज्यादा ही दिल उसका, हम दुखाते क्यों हैं 

- शांती स्वरूप मिश्र

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