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मेरे अल्फाज़

मुझे रुलाने के लिये मिल

Shanti Swaroop

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दुश्मन हूँ तेरा, तो दिल जलाने के लिये मिल !
तू एक बार फिरसे, मुझे रुलाने के लिये मिल !

अरे कुछ तो कद्र कर तू मेरे प्यार की ज़ालिम,
झूठा ही सही, दुनिया को दिखाने के लिये मिल !

किस किस से छुपाएँ अपने दिल के हरे ज़ख्म,
मरहम न सही, तो नमक लगाने के लिये मिल !

ज़िंदगी भर करता रहा मैं मनुहार सिर्फ तेरी ही,
अगर प्यार नहीं तो, मुझे सताने के लिये मिल !

ये नादान दिल तो देखता है सिर्फ तेरे ही ख़्वाब,
उस नादान को तू, सबक सिखाने के लिये मिल !

जानता हूँ कि लम्बी है मजबूरियों की फेहरिस्त,
तू अपनी मज़बूरियां फिर से बताने के लिये मिल !

ज़िंदगी की गाड़ी तो न चल सकी साथ साथ "मिश्र",
कम से कम, दो पल साथ बिताने के लिये मिल !

शांती स्वरूप मिश्र

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