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मेरे अल्फाज़

खुशियों के नज़ारे कम नज़र आते हैं

Shanti Swaroop

248 कविताएं

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दुनिया में नज़ारे खुशियों के, कम नज़र आते हैं !
दिल में हर किसी के, गम ही गम नज़र आते हैं !

ठहर जाता है जब ज़िन्दगी का कारवां कहीं पे,
पीछे यादों की गर्द, आगे रस्ते बंद नज़र आते हैं !

नहीं बाज़ आता फिर भी फ़ितरतों से ये आदमी,
मुखौटा प्यार का, पर दिलों में ख़म नज़र आते हैं !

दिन रैन लगे रहते हैं लोगों का हितैषी जताने में,
मगर ईमानो धरम, खोये हुए हरदम नज़र आते हैं !

अंत नहीं ख्वाहिशों का लोगों के दिलों में "मिश्र",
अधूरी ख्वाहिशों से आहत, बेदम नज़र आते हैं !

शांती स्वरूप मिश्र

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