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मेरे अल्फाज़

जो आश्ना थे वो भी अंजान हो गये

Shanti Swaroop

1130 कविताएं

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तेरे अंजुमन में आ कर, हम बदनाम हो गये !
जो भी आश्ना थे अपने, वो भी अंजान हो गये !

हरवक़्त बेवफ़ा जिनकी परस्तिश की हमने,
आज उन्हीं के सबब से, हम पशेमान हो गये !

कोई शिकवा नहीं उनकी ज़फाओं का यारों ,
उनकी इस फ़ितरत के, चर्चे अब आम हो गये !

शांती स्वरूप मिश्र

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