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मेरे अल्फाज़

झूठी दिलासा तो दे

Shanti Swaroop

471 कविताएं

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गर बस में नहीं है कुछ भी, तो झूठी दिलासा तो दे 
चल बातों का ही सही, दिल को कुछ सहारा तो दे 

डूबते हुए को तो तिनके का सहारा भी काफी है
कम से कम तू, साथ निभाने का कोई वादा तो दे 

तू समझता है कि शायद तेरा भी गुनहगार हूँ मैं
तो तू भी मुझ को, दी सजा का कुछ इशारा तो दे 

सींचा है प्यार का ये पौधा बड़े ही जतन से दोस्त
कर दे बर्बाद मगर, नफ़रत का कुछ मसाला तो दे 

वक़्त के साथ टूट जाते हैं क्यों अटूट रिश्ते "मिश्र"
कोई रिश्ता तोड़ने से पहले, सबब का हवाला तो दे 

शांती स्वरूप मिश्र

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