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मेरे अल्फाज़

हम सच बोलें तो हंगामा

Shanti Swaroop

993 कविताएं

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वो किसी की जान भी लेलें तो कोई बात नहीं,
अगर हम मुंह खोलें तो हंगामा
वो झूठ की महफिल सजाएं तो कोई बात नहीं,
अगर हम सच बोलें तो हंगामा
अपने झूठ का खंडन वो करदें तो कोई बात नहीं,
अगर हम कुछ बोलें तो हंगामा
जब जनता फंसाती है उनको तो दोष देते हैं हमको,
अगर हम खंडन कर दें तो हंगामा
वो खुद ही तो बनाते हैं जनता को लूट का मोहरा
गर जनता बिगड़ जाये तो हंगामा
न आता इन्हें कुछ भी मगर आता है कमाने का हुनर
गर समझाएं इनको हम तो हंगामा
मजबूरी है हमारी कि उठाये फिरते हैं इनका बस्ता
दिमाग अपना लगाएं हम तो हंगामा

शांती स्वरूप मिश्र


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