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मेरे अल्फाज़

दिल में बिठाने को जी करता है

Shanti Swaroop

1109 कविताएं

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किसी के ग़म, अपने बनाने को जी करता है 
किसी को, दिल में बिठाने को जी करता है !

आज इस दिल को क्या हुआ है खुदा जाने,
बुझती हुई शमा, फिर जलाने को जी करता है !

आफतों ने ज़र्ज़र कर दिया था जो घर मेरा ,
उसकी दरोदीवार, फिर सजाने को जी करता है!

एक मुद्दत सी गुज़र गयी जिसका साथ छूटे,
आज फिर, उसका साथ पाने को जी करता है !

- शांती स्वरूप मिश्र

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