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मेरे अल्फाज़

भला आज कल मुस्कराता कौन है

Shanti Swaroop

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आज कल दुनिया में, भला मुस्कराता कौन है,
ज़िंदगी की इस दौड़ में, हंसता हंसाता कौन है !

तारों को ताकते गुज़र जाती हो रात जिनकी,
उनको क्या पता कि, ख्वाबों में आता कौन है !

सबके दिल में होती है मुस्कराने की चाहत,
आखिर उनके होंठों से हंसी, चुराता कौन है !

इस पेट की खातिर भागती दौड़ती है दुनिया,
अब हंसने के लिये वक़्त, भला बचाता कौन है !

- शांती स्वरूप मिश्र

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