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मेरे अल्फाज़

बद्दुआ भी हमें दुआ सी लगती है

Shanti Swaroop

754 कविताएं

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उनकी तो बद्दुआ भी, हमें दुआ सी लगती है
उनकी तो हर नफ़रत, हमें दवा सी लगती है

हम तो हर चट्टान को सलाम करते हैं यारो,
हर पाषाण की सूरत, हमें खुदा सी लगती है

जीना है गर मज़े से तो चलो दुनिया के साथ,
वरना तो ये ज़िन्दगी, हमें सजा सी लगती है

न बताओ राज़-ए-दिल किसी को भी अपना,
दुनिया की हर सूरत, हमें बेवफ़ा सी लगती है

"मिश्र" न रहे वो दोस्त जो कभी होते थे पहले,
अब उनकी भी हर बात, हमें हवा सी लगती है

- शांती स्वरूप मिश्र

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