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मेरे अल्फाज़

उसकी यादों की रूसवाईयों .........

Shankarlal Gupta

16 कविताएं

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उसकी यादों की रूसबाइयो ने अश्कबार कर दिया
तन्हां चैन से जीना भी चाहा मगर जीना दुशवार कर दिया

मांगी थी खुदा से सजा प्यार में कजा पाने की
देकर कसम उसने अपनी जीना मजबूर कर दिया

खुशियां जिंदगी से छीनकर ले गई वो सब मेरी
दर्द देकर चाहत का उसने दिल मेरा बीमार कर दिया

हालात खराब हो गई गमे उल्फत में जिगर की
मांगी थी दवा बेदर्द से मुस्करा कर दर्द बेहिसाब कर दिया

अब तो कडवे अश्कों को जाम बनाकर पीते रहते हैं गमे मयखाने मै हम
उसने शराबी नाम देकर सारे शहर में बदनाम कर दिया

सरे राह एक रोज वो बीमारे हाल पूछने लगे मेरा
हँसते हुए दर्द ए दिल ने इश्क ए जुर्म से बेबाक कर दिया

बहोत आवाद थे मौहब्बत का आसियाना बनाकर सजाने से पहले
देखते देखते गमों ने खुशियों का चमन जलाकर खाक कर दिया

शंकर बुलंदशहरी 8881382349


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