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मेरे अल्फाज़

जुदा रहकर दूर जिंदगी से .....

Shankarlal Gupta

16 कविताएं

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जुदा रहकर ज़िदगी से दूर जीने का सलीका तो सिखा
जाओ
मडराते नहीं अब गुलों पर भंवरे सबब क्या है यह तो बता जाओ

उम्र भर का लाइलाज रोग दे दिया इश्क, अश्कों से अफसाना सुनाने के लिए
यादों में तडफते दिल को बहलाने का कोई हुनर तो सिखा जाओ

हर मोड पर करती रहती है मायूस दो आंखे इंतजार तेरा रात् दिन
बेजान सी हो गई ज़िंदगी लौट कर उम्मीद का चराग जला जाओ

दर्दे दिल का रोग ब्ढ़ता ही जा रहा है अब तो हर पल
देखकर हालाते जिगर क्या मुमकिन है तेरे बिन जीना ये तो बता जाओ

तेरे प्यार के नशे ने बिखेर दिया है गुलों पर शबनम की तरहा
चन्द सॉसे बाकी हैं तेरे इंतजार की कोई सब्ज़बाग आकर तो दिरवा जाओ

चराग जिंदगी का बुझता जा रहा है उदास थरथराते ओठों से
मै खामोश हो जाऊँ अपने हाथों को लवो पे मेरे लगा जाओ

शंकर बुलंदशहरी 8881382349


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