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मेरे अल्फाज़

सुख दुख....

SHANKAR lal

90 कविताएं

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सुख दुख देता है ईश्वर तुझे मत कर यह दुप्प्रचार

अपना पराया मत कर बंदे सोच ले तू नश्वर यह संसार
सुख दुख देता है ईश्वर तुझे मत कर यह दुष्प्रचार
मत कर यह दुष्प्रचार ऐसा कहना मिथ्या अल्प ज्ञान की है पहचान
जैसा तेरा कर्म होगा वैसा ही बने तेरे जीवन का सार

दौलत शौहरत पाकर कभी ना कर तू बहुत अभिमान
जिस दिन आवे काल तेरा सब कुछ होगा धूरि समान
होगा धूरि समान यदि दिल में तेरे रहा नही प्रभु प्रेम भाव सम्मान
सोच फिर कैसे मिलेगा तुझे अपने जीवन का मुक्ति का धाम

आचरण और कर्म की जीवन मे महिमा होती बड़ी अपार
एक सदा दुख का बंदी रहे दूजे का सुख ही होता जीवन आधार

मानव तू छोड़ दे बस छ्ल प्रपंच ठाट बाट भरे जीवन की ये चाह
सुखी रहेगा सदा तू छोड़ दुखों से भरी जीवन की हर लम्बी राह

----शंकर बुलंदशहरी



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