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मेरे अल्फाज़

मोहब्बत का दम घुटा जाता है...

SHANKAR lal

94 कविताएं

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सूने दिल ए अंजुमन में तेरे लौटकर वापस आने का आशिकाना ख़्याल रोज आता है
सुनाकर उम्मीदें वफ़ा के नए-नए अफसाने वापस चला जाता है

एक दिन तन्हाइयों के एक मोड़ पर आकर हम बहुत देर तक रोए
वापस आ जाओ की अब तो तेरी मोहब्बत का दम घुटा जाता है

बेजान उल्फत ने सजाए हैं एतवार के आंसुओ से आर-जुओ के ख़्वाब बहुत
तेरी चाहत के जुनून में अब मेरे अश्कों का रंग भी बदला नजर आता है

बिछड़ ना जाओ मुझसे उल्फत की गफलत भरी इंतकाम ई गलियों में
अब तो तेरी यादों की इबादत में इबारत का हर पन्ना भरा जाता है

गलत फहमियां हो गई है बहुत मेरी जिंदगी को मुझसे बेसबब मजबूरियों की तरहा
इल्जाम ए बेवफाई का नाम मेरी इश्क़े किस्मत की शौहरत में लिखा जाता है

----शंकर बुलंदशहरी

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