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मेरे अल्फाज़

कभी तीर से चुभते...

Shalini shrivastava

14 कविताएं

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शब्द
कभी तीर से चुभते,
कभी मखमल से मुलायम,
कभी अर्श तक ले जाए ,
तो कभी फर्श पर ले आते,
शब्द
कभी गले का हार,
कभी गालियां हजार,
कभी लबों पर मुस्कान लाए,
कभी गहरे ज़ख़्म दे जाए,
शब्द
कभी गैरों को अपना बना जाए,
कभी अपने कि भी जुदा कर जाए,
शब्द तलवार भी,
शब्द ढाल भी,
शब्द नीम भी,
शब्द गुड़ भी,
शब्द माया- जाल भी,
शब्द जी का जंजाल भी,
शब्द से ही भगवान,
शब्द से ही शैतान,
शब्द से आदर,
शब्द से ही अनादर,
शब्द ही पूजा ,
शब्द सा ना कोई दूजा,
शब्द से ही अज्ञानता,
शब्द से ही महानता,
शब्द की माया अजब निराली,
क्रोध, द्वेष, ईर्ष्या सब पर है भारी।।।

- शालिनी श्रीवास्तव

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