आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Kavita
Kavita

मेरे अल्फाज़

कुछ भी नहीं

Shalini Sharma

44 कविताएं

51 Views
तूफानो में नाव है मेरी कोई किनारा पास नही
कटे हुए पंछी के पर है उड़ने को आकाश नही

स्वप्न सलोने टूट गये हैं चहुं और है नाकामी
मैं पथरीली बंजर भूमि हरियाली की आस नही

अंधियारे ही अंंधियारे हैं आंधी में ना दीप जलें
जुगनू चमक रहे धरती पर होता मगर प्रकाश नही

चाँद सितारे दूर गगन में श्वेत चांदनी छायी है
बदला मौसम,छाये बादल ये उनको अहसास नही

प्यासी मरूथल में हिरणी,रेत की चादर दूर तलक
बूंद बूंद को तरस रही है बुझे कंठ की प्यास नही

कोयल का स्वर मन्द हुआ और मोर नाचते नही वहाँ
बाग बगीचो में वीरानी कारण क्या कुछ खास नही

शालिनी शर्मा

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!