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मेरे अल्फाज़

कुछ भी नहीं

Shalini Sharma

28 कविताएं

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तूफानो में नाव है मेरी कोई किनारा पास नही
कटे हुए पंछी के पर है उड़ने को आकाश नही

स्वप्न सलोने टूट गये हैं चहुं और है नाकामी
मैं पथरीली बंजर भूमि हरियाली की आस नही

अंधियारे ही अंंधियारे हैं आंधी में ना दीप जलें
जुगनू चमक रहे धरती पर होता मगर प्रकाश नही

चाँद सितारे दूर गगन में श्वेत चांदनी छायी है
बदला मौसम,छाये बादल ये उनको अहसास नही

प्यासी मरूथल में हिरणी,रेत की चादर दूर तलक
बूंद बूंद को तरस रही है बुझे कंठ की प्यास नही

कोयल का स्वर मन्द हुआ और मोर नाचते नही वहाँ
बाग बगीचो में वीरानी कारण क्या कुछ खास नही

शालिनी शर्मा

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