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मेरे अल्फाज़

मुद्दत हुई पर उसका कुछ पता भी नहीं 

Shakya Ravindra

19 कविताएं

193 Views
मुद्दत हुई पर उसका कुछ पता भी नहीं,
कोई ख़त कोई ख़बर कोई सदा भी नहीं !!

उसने इस ख़ामोशी से रिश्ते तोड़े कि,
न शिकवा न शिकायत कोई सज़ा भी नहीं !!

मैं न रोऊं इस दर्द को तो कहां जाऊं,
बहुत ढूंढा पर इसकी अब दवा भी नहीं !!

कसमें टूटीं, वादे टूटे दिल भी बिखर गया,
हो गया सब कुछ मगर कुछ हुआ भी नहीं !!

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