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KUL KE DEEPAK

मेरे अल्फाज़

कुल के दीपक

Shailendra Khare

4 कविताएं

12 Views
कैसे हैं ये कुल के दीपक
करते समाज को शर्मसार
लूट रहे कन्या की अस्मत
मौन खड़ी सरकार?

विरोध दर्ज कराने को जब
पिता ने शीश उठाया
अंतड़ियां बाहर कर उसकी
पल में मार गिराया

वासनामय वहशी दरिंदे
सहमा है परिवार
कैसे न्याय मिले गरीब को
मौन खड़ी सरकार।

- शैलेन्द्र खरे "शील"

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