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मेरे अल्फाज़

ये हर घर को जलाएंगे

shafaque rauf

123 कविताएं

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ये ज़ालिम हैं किसी के अपने नहीं बन पाएंगे, आज मुझे घर से निकाला है
कल तेरे भी घर में घुसकर आबरूएं लूट जाएंगे, ये हर घर को जलाएंगे


-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)

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