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मेरे अल्फाज़

तिफ़्ल तिफ़्ल थे तो सब्ज सब्ज था मंज़र

shafaque rauf

123 कविताएं

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तिफ़्ल तिफ़्ल थे तो सब्ज सब्ज था मंज़र
मग़ज से रूह तक अब आलूदगी भरी है

-शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


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