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मेरे अल्फाज़

तेरी मनमोहक अदा

shafaque rauf

117 कविताएं

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तेरी हर अदा है मनमोहक,
मैं स्थिर धरती सी सम्मोहित
तू बावले बादल सा चंचल,,
तू हसन है फातिमा ज़हरा का
या कन्हैया माँ यशोदा का,
तू सुन्दर छवि मेरे बालपन का,,

तेरी दुनिया में जब मैं ,
सखी बनकर मिलती हूँ
फिर पवन सा निर्बाध्य हो
समय जैसे बह जाता है
पीड़ा देता जब जग मुझे
तुझे गले लगाकर मेरा
हर भय मिट जाता है

तेरी धड़कन संगीत मेरा
मेरी भावनाओं का "अतीब"
तू है इन्द्रधनुषी घेरा
नटखटपन तेरा आनंद मन का
व पावन स्पर्श सफर रूह तक का

मेरा स्नेह,मेरा सुख सब तेरा है
मेरे अन्खियोँ के सपने तेरी आँखो में
मेरे बालक कैसे फर्क़ करूँ तुझसे
तुझमें बह रहा रक्त वो मेरा है

तेरे नयनों से आओ अश्रु चुरा लूँ
जो समुन्दर है तू वैसा ही विर्हत बना दू
जीवन को दिया है तूने इक लक्ष्य
मेरी उन्गली पकड़ के चलो कुछ दूर
तुम्हें तुम्हारी मंजिल दिखा दू!!!

-डा.शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)

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