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मेरे अल्फाज़

रह में आएगी तैरगी कितनी

shafaque rauf

123 कविताएं

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रोशनी ने नहीं सोचा कभी कि रह में आएगी तैरगी कितनी
खामूशी गर इक़रार है तेरा मिटा दी जाएगी हस्ती अपनी
ए तिफ़्ल तू क़दम अपना अब खौफ के कूचे से निकाल
रूबरू है दार ओ रसन जितना बाकी अभी जिद़ंगी उतनी

*तैरगी -अंधेरा
तिफ़्ल -बच्चा
कूचे-संकड़ा रास्ता
दार ओ रसन -सूली




-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


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