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मेरे अल्फाज़

मोहब्बत को नहीं भरम करने दो

shafaque rauf

122 कविताएं

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कोई दरिया ही बना लो कोई सूरज ही उगा लो
मोहब्बत को नहीं लेकिन तुम भ्रम करने दो


-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


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