आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Mere tasavvur mein aks uska juda rehne do

मेरे अल्फाज़

मेरे तस्ववुर में अक्स उसका जुदा रहने दो

shafaque rauf

122 कविताएं

546 Views
गम़ जमाने का बांटते मैं गम़गस्ता न हो जाऊँ
खुदगर्जी जीने की तुम कुछ मुझमें भी रहने दो

देखो इस क़दर से मुझे अपना आदी न बनाओ
मुझे खुद से भी मिलना है मुझे तन्हा भी रहने दो

फूलों की अब कदर उनको जो काँटों से हुई है
जाने दो कुछ काँटों को भी खियाँबा में रहने दो


मेरे महबूब की सीरत ऐसी,खार को फूल कर दे
अब इसी इत्र की खुशबू में मुझे ताउम्र रहने दो

उसी ने रहबर बनकर मेरा किरदार सँवारा है
वहीं उंगुली पकड़ कर मेरी जाँ भी निकलने दो

कोई बदगुमान मेरा हमदम हो नहीं सकता
मेरे तस्ववुर में वो अक्स उसका जुदा रहने दो


-डा.शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Your Story has been saved!