है उल्फत जिसका नाम शफ़क़

                
                                                             
                            हैं फसाना -ए -अजाएब अनगिनत इस दुनिया में
                                                                     
                            
हमें तो फ़क़त अपनी इक दास्तान लिखनी है

मैं किसी और सा बनूं कोई आसरा ही क्यों करें
मुझे तो मुझमें बस रही वो मैं ख़ुशनुमा देखनी है

है रुहानी रिश्ता जिससे वो मर के आबाद रहेगा
धड़कनें कोह जन्नत में वो नज़र को क्या देखनी है

कोई उसकी तस्वीर पछेू तो मेरी पलकों का पता दे
वो पा ले वो खुशी जो उसकी खुशी में निहां रखी है

है उल्फत जिसका नाम शफ़क़ क्या अजीब सी शै है
लहर सी पास ख़ुशबूओं सी दूर कि हर जा ही मिली है


-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)

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1 year ago
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