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मेरे अल्फाज़

अंधेरों को चाहिए अपनी हद में ही रहे.....

shafaque rauf

123 कविताएं

166 Views
मैं तो आफताब हूँ!!शुआ है !!!ताब भी
अब अंधेरों को चाहिए अपनी हद में ही रहे

(dedicated to all Nirbhaya)

-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


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