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मेरे अल्फाज़

अकड़ उन्हें भी थी कल पर....

shafaque rauf

122 कविताएं

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अकड़ उन्हें भी थी आने वाले कल पर
जिसने सुबह फिर कभी देखी नहीं


-डा. शफ़क़ रऊफ
अररिया (बिहार)


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