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मेरे अल्फाज़

दशहरा

Anonymous User

2 कविताएं

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रावण:- मुझे हर वर्ष जलाते हो,
एक बात कहूं;क्योंकि हर वर्ष मुझे अपने बीच ही पाते हो।

इस वर्ष भी जलाओगे,
दिल से कहो क्या इस वर्ष मुझे अपने बीच ना पाओगे?

जलुंगा फिर अगले हर वर्ष, सदियां बीत जाएंगी।
ना तुम श्री राम बन पाओगे, ना तुम मुझे भूल पाओगे।

- शादाब खान

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