आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Touch of heart

मेरे अल्फाज़

छू लो मन को..

Shabana K

87 कविताएं

87 Views
रुको नहीं चले चलो कि कारवां जुड़ता चले
थम गये तो माटी के ढेर जो कभी हिले ना डुले
छू लो मन को.. मनुष्य के पशु के तो बात बने
स्मरण रहे धरा पे ईश्वर ना सही मनुष्य धर्म चले
आँधी हो या बवंडर गति क़दमों की रुकने ना दो
कैसी भी आए विपदा मानवता को मिटने ना दो
पशु मुनष्य के जीवन का सूक्ष्म अंतर तुम समझो
कर्म की स्याही से नाम हवाओं में अपना लिख दो
परिस्थिति कुछ भी हों मदमस्त गति रुकने ना दो
सुगंध भर दो जीवन मे धरा को अपने कर्म से रंग दो

- शबाना के आरिफ़

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!