आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

यह दिल आशिकाना है

                
                                                                                 
                            यह दिल तो आशिकाना बना हुआ है,
                                                                                                

यह महबूब का दीवाना बन गया है।

अपने महबूब से दरख्वास्त करता है,
मुझे कभी बीच राह में मत छोड़ना।

मोहब्बत तो हमने पहली बार ही की है,
पहली बार में ही यह दिल आशिकाना बन गया है।

दिल की गहराई से तुम्हें चाहा लिया है,
अब इसे हमेशा चाहत बनाकर ही रखना है।

दिल्लगी का यह फरमान हो गया,
अब तो यह दिल तुम्हारा कर्जदार हो गया।

अब तो यह कर्ज तुम्हें जिंदगी भर चुकाना होगा,
क्योंकि यह दिल तुम्हारा आशिकाना हो गया।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X