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मेरे अल्फाज़

ममतामयी माँ

Seema Garg

46 कविताएं

254 Views
🙏🏻 ममतामयी माँ ~~

माँ को ईश्वर से कभी कम ना मानो तुम

ईश्वर का ही रूप है माँ खुश रखती तुमको हरदम

गम के अंधेरे हो या दुख के हों काँटे

भोली माँ ने आँचल की छाँव से तुमको सुख ही बांटें

कभी चोट लगी तुमको माँ ने आँसू बहाये

मेरे लाल मैं हूँ ना तुझे कोई आँच न आये

तुझको भरपेट दिया खुद आधे पेट सोई

तेरी खुशी की खातिर अपनी नींदें खोई

माँ के कदमों में ये स्वर्ग तुम्हारा है

माँ की आशीषों से तू पला, बढा, संवरा है

माँ की उम्मीदों को ए नादां भूल ना जाना

माँ के चरणों से ही लिपट के तुम रहना

तेरे दिये सारे दुख दर्द हँसकर के भुला देती है

एक माँ ही है जो बच्चों के लिए अपना आप मिटा देती है

नित आशीष ले जब तू घर से निकलेगा

हो अला ~ बला कैसी सबसे तू निपट लेगा

माँ की निश्चछल हंसी में गजब का जादू है

हो कैसी भी पीडा सबसे लड लेती है

माँ रहमत का दरिया है, माँ एक फरिश्ता है

माँ ईश्वर है दूजा माँ का अनमोल रिश्ता है |

सीमा गर्ग.


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