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मेरे अल्फाज़

सावन आया है

श्याम सिंह

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आओ खुशी से नाचे गाये
क्योंकि फिर सावन आया है
धो लो अपने सब मन के वहम
क्योंकि फिर सावन आया है
लेकर प्रीत संग बादल की
फिर यह बरसने आया है
नाचो गाओ -
क्योंकि फिर सावन आया है
चल रही , ठंडी पुरवैया
झूम रहे खेत खलियान उमंग होकर
क्योंकि फिर सावन आया है
बूदें हैं ये पानी की
या इनसे कोई मोती गिर रहे
खुश है आज बच्चा - बच्चा
देकर आज फिर ये नई सौगात
क्योंकि फिर सावन आया है
क्या शहर क्या गाँव
गरज रहे , बरस रहे
बनकर मेघदूत ये बादल
झूमो नाचो गाओं
क्योंकि फिर सावन आया है
छेडी इन पंछियो ने
यह कैसी तान
देखो कोई प्रियतम , कोई मल्हार
फिर कुछ कहने आया है
नाचो गाओ -
क्योंकि फिर सावन आया है
बहने दो आज मन के
इन असुद्ध भावो को
कर लो ह्रदय को फिर तृप्त
क्योंकि फिर सावन आया है
आओ झूमें नाचे गायें
फिर सावन आया है

-श्याम सिंह बिष्ट डोटल गांव
उत्तराखंड

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