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मेरे अल्फाज़

जिन्दगी

Satyendra Kumar

6 कविताएं

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चुप रहती है फिर भी बहुत कुछ कह जाती है,
कोई कुछ भी कहे सबकुछ चुपचाप सह जाती है,
हम भी चलना चाहते हैं साथ में इसके,
ये जिंदगी है देखते हैं कहां तक ले जाती है...

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