आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   BAHARE

मेरे अल्फाज़

बहरे

Satyendra Kumar

108 कविताएं

131 Views
यहां सारे लोग बहरे हैं
और हमारे मुंह पर पहरे हैं
गर कुछ लिख कर,दे दूं तो ये पढ़ भी न पायें
पढ़ लें, तो सीख न पायें
चलो, उदाहरण देकर इन्हें सिखायें
कि चोरी, डकैती व बलात्कार हट जाये।

सत्येन्द्र कुमार सिंह, गुदरी सिंह के टोला पांडे पुर बैरिया बलिया, उत्तर प्रदेश

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!